
**Chorus** hits with Portuguese-flavored
rap, futuristic textures, complex, techno-inspired beats with cosmic, beats, blending संस्कृत-english vocals and heavy basslines for a trippy, complex arrangements, multidimensional vibe, raw energy, group chanting, power of souls, dhol, group vocals, dynamic cadence, melodic choruses, gabber, swing rhythm, brushed drums, doppia voce, harmonized vocals, ambient, funk, techno, moombahcore, studio recording, hymnal, special effects, background vocals, diminished chords, tempos, electro-drug, 1980s synth, charango, catchy melody, inspiration, crying background समूह गान, clean smooth deep powerful male female vocals, dutch house acid progressive techno ट्रांस, दमदार परफॉर्मेंस

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Lyrics
सर्वशक्तिमान् नायकोऽयं महान् (Sarvaśaktimān nāyakoyaṃ mahān)
वीर्यं यस्य नास्ति परं धनं (Vīryaṃ yasya nāsti paraṃ dhanaṃ)
धर्मस्य पथे चरति सदा (Dharmasya pathe carati sadā)
शत्रूणां हृदयं भयेन कृता (Śatrūṇāṃ hṛdayaṃ bhayena kṛtā)
गुप्त जी कर्मरेखा न सीधा, न भङ्गुरः पन्थाः।
तेजस्वी चक्रवत् धावति, कालस्य अपि अजेयः सः॥
सर्वशक्तिमान् नायकोऽयं महान् (Sarvaśaktimān nāyakoyaṃ mahān)
वीर्यं यस्य नास्ति परं धनं (Vīryaṃ yasya nāsti paraṃ dhanaṃ)
धर्मस्य पथे चरति सदा (Dharmasya pathe carati sadā)
शत्रूणां हृदयं भयेन कृता (Śatrūṇāṃ hṛdayaṃ bhayena kṛtā)
गुप्त जी कर्मरेखा न सीधा, न भङ्गुरः पन्थाः।
तेजस्वी चक्रवत् धावति, कालस्य अपि अजेयः सः॥
इस कदर कोई बड़ा हो मुझे मंज़ूर नहीं
कोई बंदों में खुदा हो मुझे मंज़ूर नहीं ।
रौशनी छीन के घर घर से चिरागों की अगर
चांद बस्ती में ऊगा हो मुझे मंज़ूर नहीं ।
मुहब्बत की कोई निशानी तो दो
हमें अपनी आँखों का पानी तो दो
अधूरे सफ़र में ठहर जाएँ हम
थकन को कोई सायबानी तो दो
जहाँ दर्द अपनी हदें तोड़ दे
हक़ीक़त को वो जावेदानी तो दो
सुलगती हुई धूप के शहर में
शजर को कोई मेहरबानी तो दो
अधूरी इबादत न रह जाए ये
मुहब्बत को गुप्ता साहेब' निशानी तो दो
सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं
हम देखने वालों की नज़र देख रहे हैं
कोई तो निकल आएगा सरबाज़-ए-मोहब्बत
दिल देख रहे हैं वो जिगर देख रहे हैं
कुछ देख रहे हैं दिल-ए-बिस्मिल का तड़पना
कुछ ग़ौर से क़ातिल का हुनर देख रहे हैं
पहले तो सुना करते थे आशिक़ की मुसीबत
अब आँख से वो आठ पहर देख रहे हैं
ख़त ग़ैर का पढ़ते थे जो टोका तो वो बोले
अख़बार का परचा है ख़बर देख रहे हैं
पढ़ पढ़ के वो दम करते हैं कुछ हाथ पर अपने
हँस हँस के मेरे ज़ख़्म-ए-जिगर देख रहे हैं
मैं 'दाग़' हूँ मरता हूँ इधर देखिए मुझ को
मुँह फेर के ये आप किधर देख रहे हैं
जिंदा जिस्म की यहां कोई
अहमियत नही " ग़ालिब "
मजार बन जाने दो
मेले लगा करेंगे !!
जहर उसके दांतो में नहीं बल्कि बातों में है
ये मोबाइल भी क़यामत का हुनर रखता है
आदमी घर में है दुनिया की ख़बर रखता है
कल तलक रहती थीं किरदार पे नज़रें लेकिन
आज का आदमी कपड़ों पे नज़र रखता है
उससे मिलना तो ज़रा दूर से बातें करना
अपनी बातों में वो लफ्ज़ों के भंवर रखता है
मैने उस दुश्मने जानी को भी अपना जाना
जो मुखालिफ है मिरा मुझ पे नज़र रखता है
झूठ शाहों का सही फिर भी पकड़ जाता है
सच किसी का हो बहरहाल असर रखता है
आंखों में चुभता, सवाल होगा ,
और, अंत में बस मलाल होगा.......
कांटे तो आने ही थे
हमारे नसीब में
हमनें यार भी तो
गुलाब जैसा चुना था !
तबियत देने लगी हैं
रोज इशारे...
क्यों न सफऱ के लिए समान
समेटा जाए...!!
जिंदा जिस्म की यहां कोई
अहमियत नही " ग़ालिब "
मजार बन जाने दो
मेले लगा करेंगे !!
फासलें इस कदर है
आजकल रिश्तों में ...
जैसे कोई घर
खरीदा हो किश्तों में..
भाग्य विधाता ने सौंपा है तोहफ़ा ऐसा ख़ास मुझे
ख़्वाब दिखाया राजतिलक का और दिया वनवास मुझे
वो उम्र भर कहते रहे तुम्हारे सीने में दिल ही नहीं
दिल का दौरा क्या पड़ा, ये दाग भी धुल गया
आंखों में चुभता, सवाल होगा ,
और, अंत में बस मलाल होगा.......
माशूक ख़ुदा की बन, ए जमीनी अप्सरा
दीवाने तेरे लाखों होंगे !!
डिजिटल घाट का तन्हा फकीर गुप्ता साहेब
